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डॉ. कलाम ने भारत को रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्‍य से रक्षामंत्री से….

आज डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का जन्मदिन है।
जन्म: 15 अक्टूबर 1931, रामेश्वरम, तमिलनाडु।
मृत्यु: 27 जुलाई, 2015, शिलोंग, मेघालय।

● डॉ एपीजे अब्दुल कलाम का जीवन परिचय
तमिलनाडु के रामेश्वर ज़िले में 15 अक्तूबर, 1931 को उनका जन्म हुआ। उन्होंने भौतिकी और अंतरिक्ष विज्ञान की पढ़ाई की। एरोनॉटिकल इंजीनियरिंग करने के बाद उन्होंने 1962 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन मे नौकरी की। डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ने एयरोनॉटिकल इंजीनियर के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी।
वो हिन्दुस्तान की दो बड़ी एजेंसियों डिफ़ेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइज़ेशन (डीआरडीओ) और इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइज़ेशन (इसरो) के प्रमुख रहे थे। दोनों एजेंसियों में उन्होंने बहुत उम्दा काम किया।
अब्दुल कलाम ने अपनी आरंभिक शिक्षा जारी रखने के लिए अख़बार वितरित करने का कार्य भी किया था। कलाम ने 1958 में मद्रास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलजी से अंतरिक्ष विज्ञान में स्नातक की उपाधि प्राप्त की है। स्नातक होने के बाद उन्होंने हावरक्राफ्ट परियोजना पर काम करने के लिये भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संस्थान में प्रवेश किया। 1962 में वे भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में आये जहाँ उन्होंने सफलतापूर्वक कई उपग्रह प्रक्षेपण परियोजनाओं में अपनी भूमिका निभाई। परियोजना निदेशक के रूप में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान एसएलवी 3 के निर्माण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई जिससे जुलाई 1980 में रोहिणी उपग्रह सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में प्रक्षेपित किया गया था।
हिन्दुस्तान के पहले रॉकेट एसएलवी-3 को बनाने में उन्होंने अहम भूमिका निभाई। उन्होंने इसरो में परियोजना निदेशक के रूप में भारत के पहले स्वदेशी उपग्रह प्रक्षेपण यान पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी)-3 के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
देश के 11वें राष्ट्रपति रहे कलाम का जन्म 15 अक्टूबर 1931 को तमिलनाडु के रामेश्वरम कस्बे के एक मध्‍यमवर्गीय परिवार में हुआ। उनके पिता जैनुल आब्दीन नाविक थे।उनकी माता का नाम आशियम्मा था। उनकी आरंभिक शिक्षा पाँच वर्ष की अवस्था में रामेश्वरम के प्राथमिक स्कूल से शुरू हुई। वह बचपन से ही खासे प्रतिभाशाली रहे।
डॉ. कलाम का बचपन बड़ा संघर्ष पूर्ण रहा। उनकी दिनचर्या में प्रतिदिन सुबह चार बजे उठ कर ट्यूशन पढ़ना, फिर लौट कर पिता के साथ नमाज पढ़ना, फिर तीन किलोमीटर दूर स्थित धनुषकोड़ी रेलवे स्टेशन से अखबार लाना और घूम-घूम कर बेचना। उसके बाद स्कूल जाना और शाम को अखबार के पैसों की वसूली करना शामिल था।
उन्होंने प्राथमिक शिक्षा के बाद रामनाथपुरम के श्वार्ट्ज हाईस्कूल में प्रवेश लिया। वहाँ की शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने 1950 में सेंट जोसेफ कॉलेज, तिरुचिरापल्ली में प्रवेश लिया। वहाँ से उन्होंने भौतिकी और गणित विषयों के साथ बी.एससी. की डिग्री प्राप्त की। अपने अध्यापकों की सलाह पर उन्होंने स्नातकोत्तर शिक्षा के लिए मद्रास इंस्टीयट्यूट ऑफ टेक्नालॉजी (एम.आई.टी.), चेन्नई का रुख किया। वहाँ पर उन्होंने अपने सपनों को आकार देने के लिए एयरोनॉटिकल इंजीनियरिंग का चयन किया।
डॉ. कलाम वायु सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करना चाहते थे। लेकिन इस इच्छा के पूरी न हो पाने पर उन्होंने बे-मन से रक्षा मंत्रालय के तकनीकी विकास एवं उत्पाद विभाग में 1958 में तकनीकी केन्द्र (सिविल विमानन) में वरिष्ठ वैज्ञानिक सहायक का कार्यभार संभाला। उन्होंने अपनी प्रतिभा के बल पर वहाँ पहले ही साल में एक पराध्वनिक लक्ष्यभेदी विमान की डिजाइन तैयार करके अपने स्वर्णिम सफर की शुरूआत की।
डॉ. कलाम के जीवन में महत्वपूर्ण मोड़ तब आया, जब वे 1962 में ‘भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) से जुड़े। यहाँ पर उन्होंने विभिन्न पदों पर कार्य किया। उन्होंने यहाँ पर आम आदमी से लेकर सेना की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुरूआत की। इसरो में स्वदेशी क्षमता विकसित करने के उद्देश्य‍ से ‘उपग्रह प्रक्षेपण यान कार्यक्रम’ की शुरूआत हुई। डॉ. कलाम की योग्यताओं को दृष्टिगत रखते हुए उन्हें इस योजना का प्रोजेक्ट डायरेक्टर नियुक्त किया गया। उन्होंने अपनी अद्भुत प्रतिभा के बल पर इस योजना को भलीभाँति अंजाम तक पहुँचाया तथा जुलाई 1980 में ‘रोहिणी’ उपग्रह को पृथ्वी की कक्षा के निकट स्थापित करके भारत को ‘अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष क्लब’ के सदस्य के रूप में स्थापित कर दिया।
डॉ. कलाम ने भारत को रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्‍य से रक्षामंत्री के तत्कालीन वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. वी.एस. अरूणाचलम के मार्गदर्शन में ‘इंटीग्रेटेड गाइडेड मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम’ की शुरूआत की। इस योजना के अंतर्गत ‘त्रिशूल’ (नीची उड़ान भरने वाले हेलाकॉप्टरों, विमानों तथा विमानभेदी मिसाइलों को निशाना बनाने में सक्षम), ‘पृथ्वी’ (जमीन से जमीन पर मार करने वाली, 150 किमी. तक अचूक निशाना लगाने वाली हल्कीं मिसाइल), आकाश’ (15 सेकंड में 25 किमी तक जमीन से हवा में मार करने वाली यह सुपरसोनिक मिसाइल एक साथ चार लक्ष्यों पर वार करने में सक्षम), ‘नाग’ (हवा से जमीन पर अचूक मार करने वाली टैंक भेदी मिसाइल), ‘अग्नि’ (बेहद उच्च तापमान पर भी ‘कूल’ रहने वाली 5000 किमी. तक मार करने वाली मिसाइल) एवं ‘ब्रह्मोस’ (रूस से साथ संयुक्त् रूप से विकसित मिसाइल, ध्व़नि से भी तेज चलने तथा धरती, आसमान और समुद्र में मार करने में सक्षम) मिसाइलें विकसित हुईं।
1969 में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से जुड़े
साल 1992 से 1999 के बीच प्रधानमंत्री के मुख्य वैज्ञानिक सलाहकार और डीआरडीओ सचिव रहे।
साल 1990 में पद्म भूषण और 1997 में भारत रत्न से सम्मानित किया गया।
कलाम 2002 से 2007 तक भारत के 11वें राष्ट्रपति रहे।
भारत ने 1998 में जो परमाणु परीक्षण किया था उसमें भी डॉ कलाम की विशिष्ट भूमिका थी। उस समय वो डीआरडीओ के प्रमुख थे।
उन्होंने चार किताबें लिखीं: ‘विंग्स ऑफ़ फायर’, ‘इंडिया 2020- ए विज़न फ़ॉर द न्यू मिलेनियम’, ‘माई जर्नी’ तथा ‘इग्नाटिड माइंड्स- अनलीशिंग द पॉवर विदिन इंडिया’।

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